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Coal Gasification: क्या है कोयला गैसीकरण, जिसे कैबिनेट ने दी मंजूरी, जानें पूरी जानकारी

किसी कारखाने से गैस बनाने की प्रक्रिया को कोयला गैसीकरण कहा जाता है। कोयला गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को ऑक्सीजन, मसालों या कार्बन डाइऑक्साइड द्वारा ऑक्सीकरण किया जाता है। लेकिन इसमें महल नहीं जला है.
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SB NEWS Digital Desk, नई दिल्ली : आसान शब्दों में ऐसे समझें तो कुछ जलाकर इससे निकलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा इस वजह से किया जाता है ताकि ईंधन-गैस बनाई जा सके. इस गरम ईंधन गैस को भाप बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

इस ईंधन से कई तरह के ईंधन और केमिकल भी बनाए जाते हैं. 1800 के दशक में इसकी शुरुआत हुई थी.तब से लेकर अब तक, इस तकनीक का बहुत विकास हो चुका है. दुनियाभर में कोयले के गैसीफिकेशन को मेथनॉल, अमोनिया, एथनॉल और बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, भारत में साल 1960 के दशक से कोल गैसीफिकेशन का इस्तेाल हो रहा है. देश में झारखंड के सिंदरी में कोयले की गैसीफिकेशन यूनिट खोली गई थी. जो बाद में बंद कर दी गई.
जिंदल ने ओड़िशा के अंगुल में प्लांट बनाया था, लेकिन वो भी बंद हो गया. लेकिन फिलहाल इस दिशा में काफ़ी प्रगति हुई है.

भारत हेवी एलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने तमिलनाडु के त्रिची में पाइलट प्रोजेक्ट शुरू किया. जिसमें 6.2 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है.

अभी कौन से देशों में - चीन और जापान में फिलहाल इसका यूज हो रहा है. गैसीफिकेशन का सबसे ज्यादा यूज चीन कर रहा है. चीन इसे अपने कई उद्योगों में इस्तेमाल करता है.
जापान में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. लेकिन अगर बात दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की करें तो फिलहाल वहां न के बराबर ही इसका इस्तेमाल होता है.

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