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केंद्र सरकार का ऐलान, महिलाओं को सुना दी बड़ी खबर, ख़ुशी का ठिकाना नहीं

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस बदलाव में सरकार ने महिला कर्मचारियों को अपने पति की जगह अपने बेटे या बेटी को पारिवारिक पेंशन में शामिल करने की छूट दी है. जिसके बाद महिला कर्मचारियों को काफी सहूलियतें मिलीं. पहले इस सुविधा पर महिलाओं को प्राथमिकता थी। लेकिन ये एक बड़ी राहत और बड़ी खबर है.
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SB News Digital Desk नई दिल्ली : इससे पहले फैमली पेंशन, मृत सरकारी कर्मचारिया फिर पेंशनधारक के पति या फिर पत्नी को दी जाती थी। जबकि परिवार के दूसरे सदस्यों पति या फिर पत्नी की आपत्रता या मौत के बाद ही पात्र होते थे।

सरकार के इस नियम से उन महिलाओं को राहत मिलेगी, जिनके अपनी पति के साथ में अनबन चल रही हैं। ये फिर तलाक की स्थिति में हैं। अब ऐसी महिलाएं को अपने बच्चों के भविष्य को सेफ करने में आसानी रहेगी।

सरकार के इस नियम के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह कहते हैं कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने केंद्रीय पेंशन नियमों में संशोधन पेश किया है। जिसमें खुद की मौत होने के बाद पति या फिर पत्नी को पेंशन दे दी जाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि ये संशोधन उन स्थिति में सही होगा, जब घर में कलह या फिर तलाक की स्थिति हो।

सरकार की तरफ से ऑफिशियल रूप से बयान दिया गया है कि महिला सरकारी कर्मचारी या फिर पेंशनधारक को संबंधित कार्यालय प्रमुख को एक लिखित अनुरोध करना होगा। इस पत्र में कहना होगा उसके पति से पहले बच्चों को परिवारिक पेंशन दी जानी चाहिए। अगर इस प्रोसेस के समय महिला सरकारी कर्मचारी या फिर पेंशनधारक की मौत हो जाती है तो फैमली पेंशन अनुरोध पत्र के मुताबिक वितरित किया जाएगा।

वहीं अगर सरकारी महिला कर्मचारी विधवां हैं और उसका कोई दूसरा नहीं है तो ऐसी स्थिति में किसी को भी पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। कोई महिल विधवां किसी नबालिग बच्चे या फिर मानसिक रूप से कमजोर बच्चे की मां है तो विधवां को तब तक पेंशन मिलेगा तब तक उसकी अभिभावक रहेगी। एक बार बच्चा वयस्क हो जाता है तो पेंशन के लिए पात्र हो जाता है।

 

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